झाबुआ कलेक्टर द्वारा जिले के समस्त नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों को जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित किया गया ।

मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम के तहत नलकूप खनन पर प्रतिबंध

कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी नेहा मीना द्वारा कार्यपालन यंत्री, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग से प्राप्त जानकारी के आधार पर झाबुआ जिले में भूमिगत जलस्तर में निरंतर हो रही गिरावट तथा आगामी ग्रीष्म ऋतु में संभावित पेयजल संकट की गंभीर स्थिति को दृष्टिगत रखते हुए, लोकहित में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है।

मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम, 1986 एवं संशोधन अधिनियम, 2002 में निहित प्रावधानों के अंतर्गत अधिनियम की धारा-3 के तहत झाबुआ जिले के समस्त नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों को जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित किया गया है। साथ ही, अधिनियम की धारा 6(1) के अंतर्गत जिले में नलकूप खनन पर पूर्णतः प्रतिबंध लगाया गया है। यह आदेश दिनांक 30 जून 2026 तक प्रभावशील रहेगा अथवा वर्षा में विलंब की स्थिति में वर्षा प्रारंभ होने तक लागू रहेगा। जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित किए जाने के कारण उक्त अवधि में सभी संबंधित प्रतिबंध प्रभावी रहेंगे।

जारी आदेशानुसार, जिले के पेयजल अभावग्रस्त क्षेत्रों में स्थित सभी सार्वजनिक पेयजल स्रोतों से बिना सक्षम अनुमति के कोई भी व्यक्ति सिंचाई, औद्योगिक अथवा अन्य किसी प्रयोजन हेतु जल का उपयोग नहीं कर सकेगा। आमजन को पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु आवश्यकतानुसार जल स्रोतों का अस्थायी अधिग्रहण किया जा सकेगा, जिसके लिए संबंधित अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को सक्षम प्राधिकारी नामित किया गया है।

निजी नलकूप खनन पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। हालांकि, विशेष परिस्थितियों में निजी नलकूप खनन अथवा निजी नल कनेक्शन की अनुमति प्राप्त करने हेतु इच्छुक व्यक्तियों को निर्धारित प्रारूप में आवेदन प्रस्तुत करना होगा, जिसके साथ 50 रुपये की चालान फीस बैंक में जमा कर संलग्न करना अनिवार्य होगा।

उक्त आवेदन संबंधित अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को प्रस्तुत किया जाएगा, जो अधिनियम में वर्णित शर्तों के अधीन अनुमति प्रदान कर सकेंगे।किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग अंतर्गत स्वीकृत नलकूप खनन कार्य इस प्रतिबंध से मुक्त रहेंगे। इसके अतिरिक्त, जिले में पेयजल व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यकतानुसार लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को नलकूप खनन कार्य करने की अनुमति प्रदान की गई है।

उक्त आदेश का उल्लंघन करने पर संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध अधिनियम के तहत कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसमें 02 वर्ष का कारावास अथवा 2000 रुपये तक का अर्थदंड या दोनों से दंडनीय प्रावधान लागू रहेगा।

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